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Work & Life news कार्य और जीवन समाचार

  • Listed: September 3, 2018 4:21 pm
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“Work & Life

  • चलती ट्रेन से गिर गया है मोबाइल? ऐसे पा सकते हैं वापस October 21, 2021
    नई दिल्ली। भारत में हर दिन बड़ी संख्या में लोग यात्रा के लिए भारतीय रेलवे का सहारा लेते हैं क्योंकि यह अन्य माध्यमों से अधिक सुविधाजनक और किफायती भी है। वहीं रेलवे में यात्रा के दौरान अक्सर लोग खिड़की के पास बैठकर, एयरफोन लगाकर गाने सुनना पसंद करते हैं। लेकिन अगर इसी दौरान गलती से आपका फोन चलती ट्रेन से नीचे गिर जाए तो आप क्या करेंगे। परेशान मत होइए, आज हम आ […]
  • LPG सिलेंडर बुक करने पर Paytm दे रहा 10 हजार रुपए का सोना, ऑफर सीमित समय तक October 8, 2021
    नई दिल्ली। हर घर में आमतौर पर महीने या दो महीने में गैस सिलेंडर खत्म हो जाता है इसके बाद इसे फिर से रिफेल कराना पड़ता है, लेकिन कैसा हो अगर आपको गैस सिलेंडर रिफेल कराने पर 10 हजार रुपए का सोना जीतने का मौका मिले। ये बिल्कुल सच है, दरअसल अब हिन्दुस्तान पेट्रोलियम नवरात्रि के मौके पर अपने ग्राहकों को 10 हजार रुपए तक का सोना जीतने का मौका दे रहा है। इसके लिए आप […]
  • Patrika Women Guest Editor: लोग जितना रोकते-टोकते गए, मेरा इरादा उतना मजबूत होता गया September 20, 2021
    Patrika Women Guest Editor: मैं एक आदिवासी इलाके में पैदा हुई, पिता का देहांत बचपन में ही हो चुका था। जैसे-तैसे सातवीं तक पढ़ाई की, तो मां ने समाज के बढ़ते दबाव के कारण मुझे पढ़ाई छोडऩे को कहा। आगे की फीस के पैसे भी मां के पास नहीं थे। मैंने तभी से छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। छुटपन की इस आत्मनिर्भरता ने मुझे आत्मविश्वास दिया। लोगों ने मुझे आगे पढऩे स […]
  • Patrika She News: कभी लकडिय़ां चुनती थीं, अब एंटरप्रेन्योर हैं September 20, 2021
    Patrika She News: आदिवासी क्षेत्र की एक दर्जन महिलाओं ने एक मिसाल कायम की है। चूल्हा-चौका, जंगल से लकड़ी चुनना, बच्चे संभालने वाली महिलाएं आज न सिर्फ सेनेटरी पैड यूनिट का बेहतरीन संचालन कर रही हैं, बल्कि उन्होंने आय का बेहतर स्रोत भी तैयार कर लिया है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक में आदिवासी बाहुल्य गांव खम्हरिया की पहचान अब जिले के पहले सेनेटरी पैड उत्पादक […]
  • Patrika She News: हालात से मजबूर थीं, इरादों से मजबूत रहीं September 20, 2021
    Patrika She News: संघर्ष हर किसी के जीवन में आता है। कोई उसमें थककर हालातों से समझौता कर सपनों का गला घोट देता है, तो कोई संघर्ष कर उन सपनों को सच कर दिखाता है। ऐसी ही हैं ग्वालियर की जानवी रोहिरा, जिन्होंने बचपन में आर्थिक तंगी का काफी सामना किया। पिता पर चार बेटियों और दो बेटों की जिम्मेदारी को कम करने उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर खुद की फीस भरी। ग्रेजुएशन के दौ […]
  • कविता-कितने खुशबू भरे दिन थे वे September 12, 2021
    कितने खुशबू भरे दिन थे वे -डॉ. अतुल चतुर्वेदी पुराने अदरक को छूते हुए उसने कहा - खुशबू कहां बची है?बची नहीं है वो माटी के सौंधेपन मेंरिश्तों की ऊष्मिल गंध में भी कहां बची है पहले कितना असरदार होता था छौंक पांचवे मकान तक पता चलता था पकवान का पूरे मोहल्ले में बंटता था नवान्न सुख-दुख,हंसी, दर्द सब गांव-गांव बंटते थे भीगकर भारी हो जाता था धनिया धान की ताड़ी पी स […]
  • Best Hindi Poetry: शेषनाग वर्सेज फेसनाग September 6, 2021
    शेषनाग वर्सेज फेसनागसंजय झाला एक दिन सर्पराज 'शेषनाग'मां पृथ्वी से बोले,'मैं तुझे अपने सिर पर ढ़ोते- ढ़ोते हो गया हूं परेशानतत्काल ढूंढ लो कोई और स्थान'पृथ्वी मां बोली,'ठीक है,'सर्पपति'मैं अब और जगह खंगालती हूं,मैं तुमसे छोटी हूं, लेकिन अपनी छाती परतुमसे बड़े- बड़े पालती हूं,विश्वास नहीं होता एक भी परसेंटफिर मेरे साथ चलो पा […]
  • Hindi Poetry: कुछ पल September 4, 2021
    कुछ पलरेणुका अमित शर्मा समय के कुछ पल फिसल दामन में आए ऐसेछीनकर सुकूं रुक गए हों वो पल जैसेउलझी उन पलों में ये जिन्दगीछोर ढूंढ सुलझाऊं इसको कैसेबूंद-बूंद रिसता, खत्म होता मेरा जीवनइन फिसलते सपनों/ जिन्दगी को समेटूं कैसेविश्वास रख अपने आप पर बढ़ चली फिर लडऩे इन पलों के तूफानों सेथक नहीं सकती, मैं हार नहीं सकतीमुश्किल बड़ी और अपने को छोटी समझ लूं मैं कैसे? यहा […]
  • गजल September 4, 2021
    गजल यूसुफ रईस इश्तहारों से कुछ नहीं होगाखाली नारों से कुछ नहीं होगा। कोई सूरज नया उगाओ तुमचांद-तारों से कुछ नहीं होगा। घर की तालीम भी जरूरी हैबस इदारों से कुछ नहीं होगा। खुल के इजहार इश्क का कर दोइन इशारों से कुछ नहीं होगा। कोई मुश्किल अगर जो आई तोमेरे यारों से कुछ नहीं होगा। इश्क ख़ुशबू है फैल जाएगाराजदारों से कुछ नहीं होगा। Best Poetry in Hindi: यहां जुड़िए […]
  • Best Hindi Poetry: शेषनाग वर्सेज फेसनाग September 4, 2021
    शेषनाग वर्सेज फेसनागसंजय झाला एक दिन सर्पराज 'शेषनाग'मां पृथ्वी से बोले,'मैं तुझे अपने सिर पर ढ़ोते- ढ़ोते हो गया हूं परेशानतत्काल ढूंढ लो कोई और स्थान'पृथ्वी मां बोली,'ठीक है,'सर्पपति'मैं अब और जगह खंगालती हूं,मैं तुमसे छोटी हूं, लेकिन अपनी छाती परतुमसे बड़े- बड़े पालती हूं,विश्वास नहीं होता एक भी परसेंटफिर मेरे साथ चलो पा […]

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